Normalising process क्या है? what is Normalising in hindi

निर्मलीकरण (Normalising):-

Normalising ऊष्मा-उपचार का साधारण व सरल प्रक्रम है। इसका उपयोग सामान्यतया निम्न व मध्यम कार्बन इस्पात व मिश्र-धातु इस्पात के रेशों को सुधारने (refinement),आन्तरिक प्रतिबलों को कम करने तथा कुछ भौतिक गुणों को प्राप्त करने के लिये किया जाता है।

परिभाषा (Definition)-

Normalising ऊष्मा-उपचार का प्रक्रम है जिसके अन्तर्गत इस्पात को उसके ऊपरी क्रान्तिक परिसर से लगभग 40°C-50°C अधिक गरम करके तथा इस तापमान पर निर्धारित समय के लिये रोककर कमरे के तापमान पर वायु में ठण्डा किया जाता है।

Application :-

1. रेशों के साइज में सुधार (refinement)

2. machinability को बढ़ाना।

3. मध्यम कार्बन इस्पात की सामर्थ्य को बढ़ाना।

4. आन्तरिक प्रतिबलों को कम करना।

5. वेल्डन जोड़ों द्वारा बनी संरचनाओं (structures) के गुणों को सुधारना।

6. कुछ प्रकार के यान्त्रिक तथा विद्युत गुणों को प्राप्त करना।

सिद्धान्त (Principle)-

सामान्यतया सभी प्रकार के इस्पात तथा ढलजों (castings), रोलन (rolling) या ढलाई क्रिया के द्वारा बने कंपोनट्स के कणों (grains) का विरूपण हो जाता है

तथा उनमें आन्तरिक प्रतिबल उत्पन्न हो जाते हैं। जिसके कारण बहुत से दोष उत्पन्न होते हैं।

इन दोषों को दूर करने के लिये Normalising क्रिया की जाती है।

निर्मलीकरण क्रिया के अन्तर्गत कार्य-खण्ड को भट्टी में उसके ऊपरी-क्रान्तिक परिसर से अधिक (40°C-50°C) तक गरम करके

तथा इस तापमान पर निश्चित समय तक रखने के पश्चात् कमरे के तापमान पर स्थिर वायु में ठण्डा किया जाता है।

इसमे rate ऑफ cooling का कंट्रोल करना सम्भव नहीं है क्योंकि कंपोनट्स का शीतलन हवा में किया जाता है।

तथा वायु के तापमान के आधार पर शीतलन-दर लगभग 50°C से 120°C प्रति मिनट तक होती है।

Normalising से इस्पात (निम्न तथा मध्यम कार्बन) तथा ढलजों के कणों में सुधार (refinement) होता है और

तनाव-सामर्थ्य (tensile strength) तथा तन्यता (ductility) आदि गुणों में भी सुधार होता है।

Normalising एक सस्ता प्रक्रम है। यह बड़े ढलजों (castings) तथा फोर्जनों (forgings) के लिये अधिक उपुयक्त है।

इसका उपयोग सामान्यतया निम्न तथा मध्यम कार्बन इस्पात के खण्डों पर किया जाता है, विशेषकर उच्च प्रतिबलित (high stressed) कंपोनट्स के लिए उपयोगी है,

 

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